ईरान से ख़ाम तेल की दरआमद (इम्पोर्ट)जारी रखने का हिंदूस्तानी फ़ैसला अमरीका के चेहरे पर एक थप्पड़ के मुतरादिफ़(बराबर) है। इस फ़ैसले से बैन-उल-अक़वामी बिरादरी का ईरान को अलग थलग करदेने का फ़ैसला भी मुतास्सिर होता है। अमरीका के साबिक़ सिफ़ारतकार जो बुश नज़म-ओ-नसक़ की एक अहम शख़्सियत समझे जाते थे और हिंद।अमरीका सीवील न्यूक्लीयर मुआहिदे के मेअम्मार समझे जाते थे, कहा कि एक इंतिहाई मायूसकुन ख़बर है कि वो लोग जो हिंदूस्तान के साथ ताल्लुक़ात के अलमबरदार(हामी) थे और हिंदूस्तान को अमरीका का बाएतेमाद दोस्त क़रार देते थे,
हिंदूस्तान के साथ क़रीबी ताल्लुक़ात का दावे करते थे, मौजूदा फ़ैसले से बुरी तरह मायूस होगए हैं। ये गुज़श्ता तीन अमरीकी सोदूर के दौर से जारी कोशिशों को एक सख़्त धक्का है। जो हिंदूस्तान की यके बाद दीगरे हुकूमतों के साथ क़रीबी दिफ़ाई ताल्लुक़ात क़ायम करने के ख़ाहां थे। अमरीका के नायब वज़ीर-ए-ख़ारजा बराए सियासी उमूर निकोलस बर्नस ने अपने मज़मून में जो रिसाला दी डीपलोमीट मैं शाय हुआ है और मौजूदा उमूर के मौज़ू पर है।
कहा गया है कि हिंदूस्तान का फ़ैसला बैन-उल-अक़वामी बिरादरी के ईरान के बारे में फ़ैसलों से वाज़ेह इन्हिराफ़ है। ये ना सिर्फ अमरीका के गाल पर एक तमांचा है, बल्कि इस से अमरीकी क़ियादत की सलाहीयत के बारे में भी कई सवाल पैदा होते हैं। हिंदूस्तान अपनी ख़ाम तेल की दरआमदात के 12 फ़ीसद हिस्से के लिए ईरान पर मुनहसिर है। चुनांचे उस ने इस में कमी करने से साफ़ इनकार करदिया है।
वेलियम बर्नस ने अपने मज़मून में तहरीर किया है कि वो हाल ही में बूस्टन ग्लोब में भी अपने मज़मून में कह चुके हैं कि अमरीका को चाहीए कि वो अपने पुरअज़म तवील मुद्दती दिफ़ाई शराकतदारी के लिए जो वो हिंदूस्तान के साथ क़ायम करने का ख़ाहां है। अपनी हिक्मत-ए-अमली पर अच्छी तरह ग़ौर करले और मौजूदा सदी में आलमी सतह पर ताक़त के तवाज़ुन को पेशे नज़र रखे।
Post new comment