चीफ़ मिनिस्टर गुजरात नरेंद्र मोदी के पैदाइशी मुक़ाम वडनगर से तक़रीबन 35 किलो मीटर दूर दपडा दरवाज़ा देहात में कभी मुस्लमानों की आबादी हुआ करती थी। ताहम 2002के ख़ूनी फ़सादाद के बाद तक़रीबन पूरी मुस्लिम आबादी यहां से मुंतक़िल हो चुकी है जबकि यहां फ़सादाद के असल मुल्ज़िमीन पटेल तब्क़ा है जिन्हें मुस्लमानों के वोट हासिल हुआ करते थे।
कोई भी इस बात को नहीं बता सकता कि यहां हालात पहले जैसे कब हो जाएंगे क्योंकि यहां के लोगों के ज़ख्म बहुत गहरे हैं। दपडा दरवाज़ा के मुस्लमान क़रीबी इलाक़ों महसाणा और वीसनगर टाउन मुंतक़िल हो चुके हैं। यहां इन मुसीबतज़दा मुस्लमानों के पड़ोस और बचपन के दोस्त रहा करते हैं।
दपडा दरवाज़ा के मुक़ाम पर फ़सादाद के दौरान पेश आए दिलदोज़ वाक़ियात में एक ढेढ़ माह के नोमोलूद और उसकी माँ को इस हाल में क़त्ल किया गया कि नोमोलूद माँ के सीने से चिपटा हुआ था। एक ख़ातून को एक दवाख़ाना की इमारत से फेंक दिया गया।
यहां मालो तालाब से 11 नाशें बरामद की गई। इनमें किसी की भी शनाख़्त नहीं हो पाई। बताया गया कि फ़सादाद के आग़ाज़ के बाद दपडा दरवाज़ा के मुक़ाम पर पुलिस को पहुंचने में 12 घंटे लगे और तालाब से नाशों को निकालने पुलिस को एक माह का अर्सा लगा।
दपडा दरवाज़ा जहां कभी मुस्लिम आबादी हुआ करती थी, मुकम्मल तौर पर हिन्दू अक्सरीयती इलाक़ा में तब्दील हो चुका है। कल्लू मियां सईद की दो मंज़िला इमारत बिसमिल्लाह मंज़िल मुस्लिम मुहल्ला में अभी मौजूद है। ताहम तबाही का नमूना पेश कर रही है। इस इमारत में रहने वाले पुराने मकीन यहां लौटने को तैयार नहीं हैं।
इस इमारत के क़रीब यूसुफ़ नामी शख़्स रहा करता था जिसकी पान की दुकान थी। अपने भाई याक़ूब के साथ वो पान की दुकान चलाता था। इसके तमाम 11 अफ़राद ख़ानदान को याक़ूब को इसके बेटे और बीवी के साथ हलाक कर दिया गया।
यूसुफ़ अपनी भतीजी के हमराह यहां से मुंतक़िल हो गया। बताया गया कि याक़ूब की बेटी जो अपनी दादी के पास पनाह ले चुकी थी बादअज़ां फ़सादीयों ने दादी ज़ैनब बीबी और पड़ोसी अशरफ़ को दवाख़ाना की तीसरी मंज़िल से नीचे फेंक दिया।
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