वज़ीर-ए-दाख़िला रहमान मलिक ने कहा है कि अमरीकी कांग्रेस में बलोचिस्तान की क़रारदाद की मुज़म्मत करते हैं, क़रारदाद पाकिस्तान के अंदरूनी मुआमलात में मुदाख़िलत है , अमरीका बाज़ाबता तौर पर उस की वज़ाहत करे, ज़राए से गुफ़्तगु करते हुए उन्हों ने कहा कि बलोचिस्तान में हालात इतने ख़राब नहीं जितने बताए जा रहे हैं , बलोचिस्तान के मुआमले पर क़ौम के तआवुन की ज़रूरत है , बलोचिस्तान के हालात एक साज़िश के तहत ख़राब कराए जा रहे हैं।
वो किसी भी मुल्क को अपने दाख़िली मुआमलात में मोदाख़लत की इजाज़त नहीं देंगे।एक सवाल पर उन्हों ने कहा किदिफ़ा पाकिस्तान कौंसल के 3 रहनुमाओं के ईस्लामाबाद में दाख़िले पर पाबंदी होगी , दिफ़ा पाकिस्तान को दूसरी जगह पर जलसा करना चाहिए।वज़ीर-ए-दाख़िला रहमान मलिक ने कहा है कि ईरान पाकिस्तान के साथ अपने ताल्लुक़ात को क़दर की निगाह से देखता है
और आने वाले दिनों में दोनों मुल्कों के दरमयान ये ताल्लुक़ात मज़ीद मज़बूत होंगे,पाकिस्तान,ईरान और अफ़्ग़ानिस्तान के दरमयान सह फ्रीकी बातचीत के बाद ईरानी ख़बर रसां इदारे से गुफ़्तगु करते हुए वज़ीर-ए-दाख़िला रहमान मलिक ने कहा कि सरबराह कान्फ़्रैंस ने ख़ित्ते के मुआमलात पर तबादला-ए-ख़्याल का मौक़ा फ़राहम किया। उन्हों ने कहा कि पाकिस्तान और ईरान एक ही ख़ानदान के दो अरकान की तरह हैं ,
क्योंकि दोनों मुल्कों की तारीख़ मज़हब और सक़ाफ़्त मुश्तिर्क है,रहमान मलिक ने गुज़श्ता रोज़ ईरानी सदर महमूद अहमदी नजाद के साथ ईस्लामाबाद में अपनी मुलाक़ात का हवाला देते हुए कहा कि इन की सदर ईरान के साथ इंतिहाई ख़ुशगवार माहौल में मुलाक़ात हुई जिस में सरहद का इंतिज़ाम , बुरदाफ़रोशी और बाहमी दिलचस्पी के दीगर उमूर पर तफ़सीली तबादला-ए-ख़्याल हुआ।
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